लग्न (Ascendant) क्या है?
लग्न क्रांतिवृत्त का वह बिंदु है जो जन्म के क्षण पूर्वी क्षितिज को पार कर रहा होता है। लग्न, उदय लग्न और अंग्रेज़ी का Ascendant या Rising Sign एक ही चीज़ के नाम हैं। इसकी राशि प्रथम भाव बनती है, उसके बाद की राशि द्वितीय भाव, और इसी क्रम में पूरी कुंडली बनती है।
क्योंकि सारे भाव लग्न से गिने जाते हैं, इसलिए लग्न ही तय करता है कि आपकी कुंडली में कौन-सा ग्रह किस भाव का स्वामी है। एक ही राशि में बैठा एक ही गुरु कर्क लग्न और मकर लग्न वालों के लिए अलग फल देता है, क्योंकि दोनों में वह अलग भावों का स्वामी होता है।
सटीक जन्म समय और स्थान दोनों क्यों ज़रूरी हैं?
पृथ्वी एक दिन में 360 अंश घूमती है, इसलिए लग्न लगभग 24 घंटे में पूरा राशिचक्र पार कर लेता है, यानी लगभग हर चार मिनट में एक अंश। एक राशि 30 अंश की होती है, इसलिए लग्न की राशि औसतन हर दो घंटे में बदलती है। कुछ राशियाँ तेज़ उदय होती हैं और कुछ धीमी, और जन्मस्थान के अक्षांश पर भी गति निर्भर करती है, इसलिए यह अवधि एक से तीन घंटे तक हो सकती है।
यही कारण है कि 15-20 मिनट की भूल भी लग्न को कई अंश खिसका देती है, और राशि की सीमा के पास हो तो राशि ही बदल सकती है। जन्मस्थान भी इसी कारण मायने रखता है: अलग अक्षांश और देशांतर पर क्षितिज अलग होता है।
लग्न, चंद्र राशि और सूर्य राशि में अंतर
सूर्य राशि लगभग महीने में एक बार बदलती है और सामान्य राशिफलों में वही प्रयुक्त होती है। चंद्र राशि लगभग हर सवा दो दिन में बदलती है। लग्न लगभग हर दो घंटे में बदलता है, इसलिए तीनों में यही सबसे व्यक्तिगत है, और इसी कारण एक ही दिन जन्मे दो व्यक्तियों की कुंडली बहुत अलग हो सकती है।
लग्न से क्या पता चलता है?
वैदिक ज्योतिष में लग्न को स्वयं माना जाता है: शरीर, प्रकृति और जीवन की सामान्य दिशा। इसका स्वामी, यानी लग्नेश, कुंडली का सबसे महत्वपूर्ण ग्रह होता है। लग्न से यह भी तय होता है कि कौन-से ग्रह योगकारक हैं और आपके लिए कौन-से रत्न अनुकूल हैं।