वैदिक ज्योतिष में चंद्र राशि (जन्म राशि) क्या है?
जन्म के क्षण चंद्रमा जिस निरयन (सायन नहीं) राशि में होता है, वही आपकी चंद्र राशि या जन्म राशि कहलाती है। चंद्रमा मन, भावनाओं और स्वभाव का कारक है, इसलिए चंद्र राशि को कुंडली का मूल स्वभाव माना जाता है: आप दुनिया को कैसे ग्रहण करते हैं, न कि आप स्वयं को कैसे दिखाते हैं।
अधिकांश समय-गणनाओं का आधार भी यही है। विंशोत्तरी दशा चंद्रमा के नक्षत्र से शुरू होती है, गोचर फल चंद्र राशि से गिने जाते हैं, और अख़बारों तथा पंचांगों में छपने वाले राशिफल सूर्य राशि के बजाय चंद्र राशि के लिए लिखे जाते हैं।
आपकी वैदिक चंद्र राशि पश्चिमी चंद्र राशि से अलग क्यों आती है?
पश्चिमी ज्योतिष सायन राशिचक्र का उपयोग करता है, जो ऋतुओं से बंधा है। वैदिक ज्योतिष निरयन राशिचक्र का उपयोग करता है, जो स्थिर तारों से बंधा है। दोनों के बीच अब लगभग 24 अंश का अंतर (अयनांश) आ चुका है।
एक राशि 30 अंश की होती है, इसलिए हर ग्रह को लगभग 24 अंश पीछे खिसकाने पर चंद्रमा करीब पाँच में से चार बार पिछली राशि में चला जाता है। यदि किसी पश्चिमी चार्ट में आपका चंद्रमा मिथुन में बताया गया है, तो यहाँ की निरयन गणना में वह संभवतः वृषभ आएगा। यह कैलकुलेटर भारत में मान्य लाहिरी अयनांश का उपयोग करता है।
क्या राशि जानने के लिए सही जन्म समय ज़रूरी है?
चंद्रमा एक दिन में लगभग 13 अंश चलता है और हर राशि में सवा दो दिन से कुछ अधिक रहता है। इसलिए ज़्यादातर जन्म-तारीखों में केवल तारीख से ही राशि तय हो जाती है। यदि उसी दिन चंद्रमा ने राशि बदली हो, तो समय से पता चलता है कि आप किस ओर पड़ते हैं।
यदि जन्म समय और स्थान पता हों तो अवश्य भरें। स्थान से समय क्षेत्र तय होता है, जो घड़ी के समय जितना ही महत्वपूर्ण है। समय पक्का न हो तो परिणाम में चंद्रमा राशि के कितने अंश चल चुका था, यह भी दिखता है, ताकि आप देख सकें कि आप राशि की सीमा के कितने पास हैं।
चंद्र राशि का उपयोग किसलिए होता है?
राशि पता चलने के बाद आप अपनी वर्तमान दशा देख सकते हैं, जांच सकते हैं कि साढ़ेसाती चल रही है या नहीं, और हर ग्रह का चंद्र राशि से गोचर पढ़ सकते हैं। अष्टकूट कुंडली मिलान भी दोनों व्यक्तियों की चंद्र राशि और नक्षत्र से ही शुरू होता है।